Dard Bhari Shayari in Hindi

जो नजर से गुजर जाया करते हैं; वो सितारे अक्सर टूट जाया करते हैं; कुछ लोग दर्द को बयां नहीं होने देते, बस चुपचाप बिखर जाया करते हैं।

तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है; जिसका रास्ता बहुत खराब है; मेरे ज़ख्म का अंदाज़ा न लगा; दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है।

हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे; वो भी पल पल हमें आजमाते रहे; जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया; हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।

रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है; ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है; हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू; ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।

हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे; लफ्ज कागज पर उतर जादूगरी करने लगे; कामयाबी जिसने पाई उनके घर बस गए; जिनके दिल टूटे वो आशिक शायरी करने लगे।

दिल मेरा जो अगर रोया न होता; हमने भी आँखों को भिगोया न होता; दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को; ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता।

लिखूं कुछ आज यह वक़्त का तकाजा है; मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है; गिर पड़ते हैं मेरे आंसू मेरे ही कागज पर; लगता है कि कलम में स्याही का दर्द ज्यादा है!

वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं; कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं; दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद; वो ज़ख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं।

खून बन कर मुनासिब नहीं दिल बहे; दिल नहीं मानता कौन दिल से कहे; तेरी दुनिया में आये बहुत दिन रहे; सुख ये पाया कि हमने बहुत दुःख सहे।

हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम; हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम; अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला; ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।

न जाने क्यों हमें आँसू बहाना नहीं आता, न जाने क्यों हाल-ऐ-दिल बताना नहीं आता, क्यों सब दोस्त बिछड़ गए हमसे, शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता।

आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये, तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये, कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें, और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये।

मेरा ख़याल ज़ेहन से मिटा भी न सकोगे, एक बार जो तुम मेरे गम से मिलोगे, तो सारी उम्र मुस्करा न सकोगे।

दिल के टूटने से नही होती है आवाज़, आंसू के बहने का नही होता है अंदाज़, गम का कभी भी हो सकता है आगाज़, और दर्द के होने का तो बस होता है एहसास।

ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं, हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं, दिल के दर्द सुनाएं तो किसको, जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है।

वो रात दर्द और सितम की रात होगी, जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी, उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर, कि एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी।

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Dard Bhari Shayari in Hindi

दर्द कितना है बता नहीं सकते, ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते, आँखों से समझ सको तो समझ लो, आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते।

अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे, इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे, उनसे क्या गिला करें, भूल तो हमारी थी, जो बिना दिल वालों से ही दिल लगा बैठे।

दिल के दर्द छुपाना बड़ा मुश्किल है, टूट कर फिर मुस्कुराना बड़ा मुश्किल है, किसी अपने के साथ दूर तक जाओ फिर देखो, अकेले लौट कर आना कितना मुश्किल है।

वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते, खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते, मर गए पर खुली रखी आँखें, इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते।

ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे, आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे, ये मत पूछना किसने दर्द दिया, वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।

एक अजीब सा मंजर नज़र आता है, हर एक आँसूं समंदर नज़र आता है, कहाँ रखूं मैं शीशे सा दिल अपना, हर किसी के हाथ मैं पत्थर नज़र आता है।

कांटो सी चुभती है तन्हाई, अंगारों सी सुलगती है तन्हाई, कोई आ कर हम दोनों को ज़रा हँसा दे, मैं रोता हूँ तो रोने लगती है तन्हाई।

हर ख़ुशी के पहलू हाथों से छूट गए, अब तो खुद के साये भी हमसे रूठ गए, हालात हैं अब ऐसे ज़िंदगी में हमारी, प्यार की राहों में हम खुद ही टूट गए।

न वो सपना देखो जो टूट जाये, न वो हाथ थामो जो छूट जाये, मत आने दो किसी को करीब इतना, कि उसके दूर जाने से इंसान खुद से रूठ जाये।

एक लफ्ज़ उनको सुनाने के लिए, कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने ज़माने के लिए, उनका मिलना ही मुक़द्दर में न था, वर्ना क्या कुछ नहीं किया उनको पाने के लिए।

जहाँ खामोश फिजा थी, साया भी न था, हमसा कोई किसी जुर्म में आया भी न था, न जाने क्यों छिनी गई हमसे हंसी, हमने तो किसी का दिल दुखाया भी न था।

दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता, रोता है दिल जब वो पास नहीं होता, बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में, और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।

तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है, जिसका रास्ता बहुत खराब है, मेरे ज़ख्म का अंदाज़ा न लगा, दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है।

कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते, हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते, अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा, बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।

कभी कभी मोहब्बत में वादे टूट जाते हैं, इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते हैं, झूठ बोलता होगा कभी चाँद भी, इसलिए तो रुठकर तारे टूट जाते हैं।

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वो तो अपने दर्द रो-रो कर सुनाते रहे, हमारी तन्हाईयों से आँखें चुराते रहे, और हमें बेवफ़ा का नाम मिला, क्योंकि हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।

बिन बताये उसने ना जाने क्यों ये दूरी कर दी, बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी, मेरे मुकद्दर में ग़म आये तो क्या हुआ, खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।

ग़म इसका नहीं कि तू मेरा न हो सका, मेरी मोहब्बत में मेरा सहारा ना बन सका, ग़म तो इसका भी नहीं कि सुकून दिल का लुट गया, ग़म तो इसका है कि मोहब्बत से भरोसा ही उठ गया।

बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की, कोई किसी को टूट कर चाहता है, और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है।

मेरे दिल का दर्द किसने देखा है, मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है, हम तन्हाई में बैठे रोते हैं, लोगों ने हमें महफ़िल में हँसते देखा है।

हर बात में आंसू बहाया नहीं करते, दिल की बात हर किसी को बताया नहीं करते, लोग मुट्ठी में नमक लेके घूमते है, दिल के जख्म हर किसी को दिखाया नहीं करते।

हर वक़्त तेरे आने की आस रहती है, हर पल तुझसे मिलने की प्यास रहती है, सब कुछ है यहाँ बस तू नही, इसलिए शायद ये जिंदगी उदास रहती है।

वक्त नूर को बेनूर कर देता है, छोटे से जख्म को नासूर कर देता है, कौन चाहता है अपनों से दूर होना, लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।

दर्द दे गए सितम भी दे गए, ज़ख़्म के साथ वो मरहम भी दे गए, दो लफ़्ज़ों से कर गए अपना मन हल्का, और हमें कभी ना रोने की कसम दे गए।

अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे, तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे, ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको, सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।

कैसे बयान करें आलम दिल की बेबसी का, वो क्या समझे दर्द आंखों की इस नमी का, उनके चाहने वाले इतने हो गए हैं अब कि, उन्हे अब एहसास ही नहीं हमारी कमी का।

जिंदगी भर दर्द से जीते रहे, दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे, कई बार सोचा कह दू हाल-ए-दिल उससे, पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे।

दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना, अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना, कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं, फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना।

हर सितम सह कर कितने ग़म छिपाये हमने, तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने, तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला, बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।

गहरी रात भी थी हम दर भी सकते थे हम जो कहे ना सके वो कर भी सकते थ तुम ने साथ छोड़ दिया हमारा ये भी ना सोचा हम पागल थे तेरे लिए मर भी सकते थे

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मेरी मोहब्बातें भी अजीब थी मेरा फैज़ भी था कमाल पर कभी सब कुछ मिला बिना तलब के तो कभी कुछ ना मिला सवाल पर

कैसे करें बयाँ तुझसे दर्द की इन्तहा को अब्बास अपनी ही निगाहों की नमी देख कर रो पड़े आज हम

मोहब्बत वो हसीं गुनाह है जो मैंने तुझसे ख़ुशी से किया है पर मोहब्बत में इंतज़ार वो सजा है सिर्फ इंतज़ार सिर्फ इंतज़ार सिर्फ इंतज़ार किया है

ये इश्क वो मोहब्बत की रिवायत भी अजीब है पाया नहीं जिस को उसे खोना भी नहीं है लिप्त है मेरे दिल से किसी खुवाब की सूरत वो शख्स को मेरा होना भी नहीं है

अब से सावन में सब का हिसाब कर दूंगा जिसका जो बाकी है में वो हिसाब कर दूंगा और मुझको इस गिलास में ही क़ैद रखना वरना पुरे शहर का पानी से सह्राब कर दूंगा

अगर मोहब्बत की तिजारत का इतना शौक है तो ये भी सुन लो यहाँ वफ़ा का कोई मोल नहीं होता और बेवफाई बहुत अनमोल होती है

ना तड़पता दिल ना रोती आँखें ना लबों पे कोई नाम और होता हर तेरी तमन्ना क्यू करते अगर तेरे जैसा कोई और होता

लेके चले थे तूफान ठोकरों का दर ना था संग था कारवां बिछड़ने का गम ना था आर्जो थी साथ रहने की इम्र भर लेकिन मिलने का वक़्त ना था कोशिश तो बोहत की मगर नज़रें मिलाने का दम ना था

समेट कर ले जाओ अपने झूटे वादों के अदुरे किस्से अगली मोहब्बत में तुम्हें ये काम आयेंगे

पहले तुझको तमन्ना मेरी थी और मुझ को तमन्ना तेरी थी अब तुझको तमन्ना किसी और की है जा अब तेरी तमन्ना कौन करे

मासूम चहेरा निगाहें फरेबी लबो पे हँसी और में जगह है मिले यार यहाँ तेरे जैसा आये सनम तो दुस्मानो की ज़रूरत किया है

तुम लाख छुपाओ सीने में अहेसास हमारी चाहत का दिल जब भी तुम्हारा धड़केगा आवाज़ यहाँ तक सुनाई देगी

हमने उस के नर्म होंटों को चूमने की कोशिश की इज़ाज़त मांगी होंठ करीब लाकर कहा पागल पियार में इज़ाज़त नहीं होती

वफ़ा भी मेरी अदा भी मेरी दुआ भी मेरी जफा भी मेरी तो फिर मोहब्बत में ये तेरा किया कमाल है के सवाल भी तेरा

अगर यकीन ना हो तो बिछड़ कर देख लो तुम मिलोगे सबसे मगर हमारी ही तलाश में इतना बुरा तो ना था जो यु भुला दिया मुझको कभी जो याद आऊं तो ओने फैसले पर गौर करना

भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया, तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया, किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो, सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया।

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